रविवार, 26 जुलाई 2020

भोले कान्हा

भोले कान्हा

देखा अजब इक ख्वाब देखा
भोले को देखा, या कान्हा को देखा 2

गंगा... जटा से बहाते देखा
हरिखण्ड बालो में गूँथा देखा
शशि मुकुट भी सजाए देखा
सर्पो की माला लपेटे देखा
सांवरे से तन में मैंने
नीलकंठ जगमगाते देखा
देखा अजब इक ख्वाब देखा
भोले को देखा, या कान्हा को देखा

डमरू की धुन पे नटराज बनते
कान्हा को मैने थिरकते देखा
यमुना तट पे धूनी रमाते
भोले को रास रचाते देखा
देखा अजब इक ख्वाब देखा
भोले को वंशी बजाते  देखा
देखा अजब इक ख्वाब देखा
भोले को देखा, या कान्हा को देखा

भंगा पीते कान्हा को देखा
माखन चुराते भोले को देखा
भभूती लपेटे कान्हा को देखा
सोलह श्रृंगार में भोले को देखा
देखा अजब इक ख्वाब देखा
भोले को देखा, या कान्हा को देखा

भोले में मैंने कान्हा को देखा
कान्हा में मैंने भोले को देखा।।
भोले में मैंने कान्हा को देखा
कान्हा में मैंने भोले को देखा।।

🙏🙏🙏 जय भोलेनाथ🙏🙏

✍️गौरव

भोपाल मध्यप्रदेश

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