सोमवार, 12 अक्टूबर 2026

पधारो माँ !!!

 

मैं धन्य धन्य हो जाऊँगा,

मेरे अँगना में जो पधारो माँ, 2

मेरे अँगना में जो पधारो माँ,

मेरी पूजा को स्वीकारो माँ, 2

मैं धन्य धन्य हो जाऊँगा,

मेरे अँगना में जो पधारो माँ, ।।


मैं धन्य धन्य हो जाऊँगा,

तेरे चरणों  को जो पघारुं माँ, 2

तेरे चरणों  को जो पखारुं माँ,

हल्दी, माहुर मैं लगाऊँ माँ, 2

मैं धन्य धन्य हो जाऊँगा,

मेरे अँगना में जो पधारो माँ, ।।


मैं धन्य धन्य हो जाऊँगा,

तुझे हलवा पूरी खिलाऊँ माँ, 2

तुझे हलवा पूरी खिलाऊँ माँ,

तुझे चुनरी लाल ओढ़ाऊँ माँ, 2

मैं धन्य धन्य हो जाऊँगा,

मेरे अँगना में जो पधारो माँ, ।।


मैं धन्य धन्य हो जाऊँगा,

तुझे नई नई भेंटें सुनाऊँ माँ, 2

तुझे नई नई भेंटें सुनाऊँ माँ, 

तुझपे बलिहारी जाऊँ माँ, 2

मैं धन्य धन्य हो जाऊँगा,

मेरे अँगना में जो पधारो माँ, ।।

मैं धन्य धन्य हो जाऊँगा,

मेरे अँगना में जो पधारो माँ, ।।.....✍️गौरव

13.10.26





रविवार, 4 अक्टूबर 2026

सेवा निवृत्ति काव्य


​सेवा में रहा समर्पण और त्याग आपका,

कृतज्ञ रहेगा सदा विभाग आपका।

हम अनुचर हैं आपके, पदचिन्ह चलेंगे,

विश्वास है मिलता रहेगा साथ आपका।।


​अनमोल है खज़ाना अनुभव का आपका,

साझा किया ये ज्ञान, है उपकार आपका।

हो आम या हो ख़ास सबसे मर्यादित रहे,

है अनुसरण योग्य ये व्यवहार आपका।।


​शुभकामनाएं और धन्यवाद आपका,

अब स्वस्थ रहें, मस्त रहे संसार आपका।

विदाई की इस बेला में मन हो रहा उदास,

हृदय में रहेगा सदा निवास आपका...।। ✍️गौरव

रविवार, 27 सितंबर 2026

मेरे महादेवा

तर्ज़: आने से उसके आये बहार....

मुखड़ा:

माथे पे जिनके चंद्र विशाल,

शीश से बहती गंगा की धार।

बड़े भोले-भाले हैं.....मेरे महादेवा,

अलबेले निराले हैं.... मेरे महादेवा॥


​अंतरा 1:

कंठ में है धरते, जहरीले नागों की माला,

जग का पालन करते, पीके हलाहल विष का प्याला।

तन पे भभूत लपेटे हैं जो,

बाघम्बर धारी हैं... मेरे महादेवा,

सुंदर शुभकारी हैं... मेरे महादेवा।

बड़े भोले-भाले हैं मेरे महादेवा,

अलबेले निराले हैं मेरे महादेवा॥

​अंतरा 2:

कर में बाजे डमरू, नाचे होके मगन मतवाला,

नंदी की सवारी करके, आए भगत रखवाला।

भक्तों का कल्याण करे,

सबके संकट टारे हैं... मेरे महादेवा,

भक्तों के सहारे हैं... मेरे महादेवा।

बड़े भोले-भाले हैं मेरे महादेवा,

अलबेले निराले हैं मेरे महादेवा॥

​अंतरा 3:

है मसान में रमते, भोले सबको यही हैं सिखाते,

ये जगत है नश्वर, अंत में सब मुझमें समाते

माया के बंधन को,

क्षण भर में छुड़ाते हैं... मेरे महादेवा,

मुक्ति देने वाले हैं... मेरे महादेवा।

बड़े भोले-भाले हैं मेरे महादेवा,

अलबेले निराले हैं मेरे महादेवा॥✍️गौरव

28.9.26

11.45.am


बुधवार, 2 सितंबर 2026

कृपा करो भोलेनाथ


कृपा करो भोलेनाथ


 आन पड़े तेरे द्वारे, कृपा करो भोलेनाथ

ले लो शरण मे अपनी, हम अभागे अनाथ नाथ मेरे 1


मस्तक चंद्र विराजे,शीश जटा गंग धारे

इनसे हल्कों मैं हूं, मोहे चरनन में राख नाथ मेरे 2


तुम तो भोले सुंदर इतने,काहे भस्म लपेटे फिरते

काहे डाले सर्प गले मे, जे मुंह से उगलें आग नाथ मेरे 3


काहे ना तुम रास रचाए, काहे मशान में धूनी रमाए

जो भी दुख है तुमको भोले,दे के मुझे मुस्काओ नाथ मेरे 4


विष को कंठ में धारे बैठे, अमृत जग को बांट देते

सबको सब कुछ देने वाले, मोहे दर्शन की आस नाथ मेरे 5


जैसे डमरू बाजे कर में, वैसे श्वास चले इस तन में

तुम जीवन आधार हो भोले, तुझमे अटके प्राण नाथ मेरे 6.. ✍️ गौरव

03.09.2026

10.30 AM

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

महाकाल की सवारी


महाकाल की सवारी

फूलों में सज रही है, महाकाल की सवारी

है साथ गौरी मैया, संग नंदी ब्रह्मचारी.....१

ऐसो ना कोई दूल्हा, ऐसी बारात न्यारी

जन्मों के पाप छूटे, हम बन गए बराती...२

तीनों भुवन से प्यारी, अवन्तिका हमारी

महाकाल संग खेले, जहां वृंदावन बिहारी...३

डम डम बाजे डमरू, झूमे दुनिया सारी

महाकाल में समाई, है ये सृष्टि सारी...४

कालों के काल बाबा, सुन लो अरज हमारी

काटो जनम के फेरे, आये शरण तिहारी...५

फूलों में सज रही है, महाकाल की सवारी

है साथ गौरी मैया, संग नंदी ब्रह्मचारी.....✍️गौरव

12.08.26


गुरुवार, 16 जुलाई 2026

तसल्ली

 

 

तसल्ली

​उम्र दराज़ों से बाहर निकल आई है,

किनारे बालों के चांदी जगमगाई है।

​सजते-संवरते थे कभी जिस आईने में हम,

आज देखा तो एक झुर्री नज़र आई है।

​ग़लतियों के कई टुकड़े गवाह, मेरी हार के,

जोड़कर जिन्हें हमने, समझ अपनी बढ़ाई है।

​छोटी कोशिशों ने बड़ा तजुर्बा दिया हमें,

शांत रहकर भी जीती हर लड़ाई है।

​रफ़्तार ज़िन्दगी की कुछ थम सी गई,

तसल्ली कोने में बैठी मुस्कुराई है।

​सफ़र की दोपहर ही ढली है अभी 'गौरव',

ख़ूबसूरत शाम की बाक़ी, मुंहदिखाई है। ✍️गौरव

 

17.07.2026 

11.45 am

भोपाल 

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गुरुवार, 4 जून 2026

भोपाल


   भोपाल

वो सुकून, वो राहत  

अब नज़र नहीं आती,  

वो ठहराव, वो ताज़गी  

अब नज़र नहीं आती।  

जिनसे मिलती थीं सांसें   

ज़िन्दगी को,

वो हवा, वो हरियाली  

अब नज़र नहीं आती।  

  

वो झील के किनारे की शामें,  

जो ख़ामोश-सी मुस्काती थीं,  

साँसों में घुल जाती थी जो,  

वो ख़ुशबू अब नज़र नहीं आती।  

  

कंक्रीट के जंगलों में  

खो गई कतार पेड़ों की,  

हर पल जो करती थी रखवाली,  

वो प्रकृति अब नज़र नहीं आती।  

  

अंधाधुंध विकास की दौड़ में  

वो अनमोल भोपाल खो गया,  

जिस पर था कभी गुमान,  

अब वो ख़ुशहाली नज़र नहीं आती।  

  

झीलों का शहर तो आज भी है,  

मगर वो बात पुरानी  

नज़र नहीं आती,  

दिल ढूँढ़ता है जिस भोपाल को,  

अब उसकी कोई निशानी  

नज़र नहीं आती।

✍️गौरव 

05.06.2026

10.30.am

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सोमवार, 30 मार्च 2026

लड़को वाली बात

 

लड़को वाली बात


अब वो आशिक़ी नहीं रही,

अब वो आवारगी नहीं रही,

तुझे देखने की हसरत में

फिरते थे मारे-मारे,

अब वो पागलपन,

वो दीवानगी नहीं रही।


तज़ुर्बा हो गया है अब,

दूर रहकर भी रिश्ते

निभा लेता हूँ मैं।

हंसता भी हूँ, हंसाता भी हूँ,

टूटे दिल के साथ भी

खुद को संभाल लेता हूँ मैं।


अब वो खाम-ख्याली नहीं रही,

तसव्वुर में भी हकीकत यही रही,

फ़र्ज़ों ने गढ़ दिया

एक नया शख्स मुझमें,

अब मुझमें वो

लड़कों वाली बात नहीं रही। ✍️गौरव

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शनिवार, 7 मार्च 2026

मुसाफ़िर की तलाश

                                 मुसाफ़िर की तलाश

मुखड़ा (Hook)

कहीं मिले खुशियाँ तो लेते आना,

कहीं मिले सुकून तो लेते आना।

थक गया हूँ ज़िंदगी के मसलों से,

कहीं मिले नींद… तो लेते आना।।

Verse 1

अब इस सफ़र का कोई ठौर नहीं दिखता,

मेरी उलझनों का कोई छोर नहीं दिखता।

जाने कहाँ से रोज़ सवाल चले आते हैं,

जवाबों के सिवा कुछ और नहीं दिखता।।

कभी करो सफ़र तो इधर से गुज़रना,

कभी मिले वक़्त तो दो पल ठहरना।

राह-ए-तन्हाई के इस अँधेरे मोड़ पर,

कहीं मिले भोर… तो लेते आना।।

Verse 2

करता हूँ तलाश… फिर भी कोई नहीं मिलता,

दे ज़िंदगी में साथ… ऐसा कोई नहीं मिलता।

मिलते तो बहुत हैं ग़म बाँटने मुझसे,

पर मेरा ग़म बाँट ले… ऐसा कोई नहीं मिलता।।

कभी मिले फुर्सत… तो ग़म बाँटते जाना,

मेरे चेहरे की हर शिकन मिटाते जाना।

फिर चल पड़ूँ मैं बनकर कारवाँ ज़माने में,

बस इतनी सी उम्मीद… मुझे दिलाते जाना।।

Bridge

बहुत शोर है दुनिया की राहों में,

कहीं मिले ख़ामोशी… तो लेते आना।

खो गया हूँ भीड़ में खुद को खोजते खोजते,

कहीं मिल जाए तुम्हें गौरव… तो लेते आना।।

Final Hook

कहीं मिले खुशियाँ तो लेते आना,

कहीं मिले सुकून तो लेते आना।

थक गया हूँ ज़िंदगी के मसलों से,

कहीं मिले नींद… तो लेते आना।।✍️गौरव

07.3.26

10.50 PM 

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सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

पढ़ो तुम, बढ़ो तुम...

 पढ़ो तुम, बढ़ो तुम


पढ़ो तुम, बढ़ो तुम

दूर गगन में उड़ो तुम

मेहनत के पंख लगाकर

आसमाँ पर चढ़ो तुम

पढ़ो तुम, बढ़ो तुम

आसमाँ पर चढ़ो तुम


सागर में विज्ञान के

तैरो गोता लगाओ तुम

ज्ञान के प्रकाश से

अज्ञानता को हरो तुम

पढ़ो तुम, बढ़ो तुम

आसमाँ पर चढ़ो तुम


अपनी रुचियों से हरी-भरी

ऐसी दुनिया चुनो तुम

कला के संसार में

फूल जैसे खिलो तुम

खेल के मैदान में

चौके छक्के जड़ो तुम

पढ़ो तुम, बढ़ो तुम

आसमाँ पर चढ़ो तुम


मौके ऐसे भी आएँगे

सब आगे निकल जाएँगे

विश्वास स्वयं पर दृढ़ रखना

परिणाम से मत डरो तुम

पढ़ो तुम, बढ़ो तुम

दूर गगन में उड़ो तुम

मेहनत के पंख लगाकर

आसमाँ पर चढ़ो तुम

पढ़ो तुम, बढ़ो तुम

आसमाँ पर चढ़ो तुम...

✍️गौरव

10.2.26

शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

झोंका ए हवा

 झोंका-ए-हवा


जब भी छूता है कोई झोंका-ए-हवा तन को,

तेरी मौजूदगी का होता है, एहसास मुझे।


तू तो मौसम की तरह रंग बदल जाता है,

फिर भी माना है मैंने मेरा, आसमान तुझे।


मेरी आँखों में ठहरे लम्हे, मुलाक़ातों के,

मेरे हर ग़म से वही देते हैं, निज़ात मुझे।


तेरी नाराज़गी की हर वजह मिटा दूँगा,

तू जो लौटे तो बता दूं मेरे ज़ज्बात तुझे।


तेरी यादों में, एक खुशनुमा सी ताज़गी है,

उम्र भर देती है जीने की जो सौग़ात मुझे।

✍️गौरव

26.09.2025

ज़िन्दगी

 ए ज़िन्दगी अब तुझमें वो बात नही रही

अब पहले जैसी वो तरबियात नहीं रही

वो हक़ के लिए लड़ाना,

सीखना सिखाना

संघर्ष की ज़मीन पर

गिराना चलाना

सपने दिखाकर

मेहनत कराना

थकाना और थकाकर

पल भर सहलाना

अब तुझमे वो सारी

खुराफ़ात नही रही

पहले जैसी अब तू

तुनकमिजाज नही रही

ए ज़िन्दगी अब तुझमे

वो बात नही रही।।

✍️गौरव

20.09.2025

सोमवार, 15 सितंबर 2025

अधूरी मोहब्बत

 


अधूरी मोहब्बत


सिरहाने तकिए के हर रात गुज़र करती है,

अधूरी मोहब्बत भी ताउम्र असर करती है।


शुआ-ए-आफ़ताब में सब कुछ भुला देती है,

बे-नूर रतजगों में दिल को बेसबर करती है।

अधूरी मोहब्बत भी ताउम्र असर करती है।


तन्हाई में ही नहीं, महफ़िलों में भी अक्सर,

हर खुशनुमा लम्हे में कुछ तो क़सर करती है।

अधूरी मोहब्बत भी ताउम्र असर करती है।


हमसफ़र भी मिला, मंज़िलें भी मिल गईं,

बीती मोहब्बत फिर भी यादों में सफ़र करती है।

अधूरी मोहब्बत भी ताउम्र असर करती है।


गुज़िश्ता लम्हों के गुलशन से गुज़रकर देखा,

सूखे गुलाबों में खुशबू अब भी बसर करती है।

अधूरी मोहब्बत भी ताउम्र असर करती है।


कहकहों की भीड़ में देखता है गौरव,

वो आँखों में छुपे अश्क़ सा बसर करती है।

अधूरी मोहब्बत भी ताउम्र असर करती है।

✍️गौरव 

15.09.2025 

8:00 PM

शुक्रवार, 1 अगस्त 2025

असीर (ग़ज़ल)

 ग़ज़ल


अदीब बनके निकले थे तेरे आशियाने को

हक़ीक़त ये थी कि मैं इश्क़ में फ़ाज़िल नही था।


इक्तिज़ा थी मेरी कि तू भी इक़रार करे

मगर इज़हार-ए-इश्क़ मेरा,  तेरे मुताबिक़ नही था।


इत्तेफ़ाक़न इश्क़ समझ बैठा दिल-ए-आश्ना को

तेरे अंदाज़-ए-गुफ़्तगू से मैं वाक़िफ नही था।


असीर बनके रह गया हूँ कैद-ए-तन्हाई का

मेरा ज़ामिन कोई भी तेरे माफ़िक़ नही था।


सुना है वो भी अब शर्मिन्दा है "गौरव"

तासीर से मैं भी इतना,नाकाबिल नही था।।


✍️गौरव

भोपाल मध्यप्रदेश

16.06.2020

अदीब- जानकार     फ़ाज़िल- निपुण

इक्तिज़ा- चाह         आश्ना- जान पहचान

असीर- क़ैदी        ज़ामिन- जमानतदार

तेरे इश्क़ ने...

 तेरे इश्क़ ने...


जो ना देखा था कभी वो,तेरे इश्क़ ने दिखा दिया,

यूँ ना था बेबस कभी मैं, तेरे इश्क़ ने बना दिया।।


महफिलों में यारों की,अपना एक रुतबा था,

यूँ ना था तन्हा कभी मैं,तेरे इश्क़ ने करा दिया।।


मसखरी की मस्तियाँ थी,ज़िन्दगी के खजाने में,

यूँ ना था रोया कभी मैं,तेरे इश्क़ ने रुला दिया।।


हसरतों ने सिखाये थे, हुनर हमें ज़माने के,

एक यूँ बदनाम होना, तेरे इश्क़ ने सिखा दिया।।


हौंसले की कश्तियों से, था मैं साहिल ढूंढता,

बेवफाई के भंवर में, तेरे इश्क़ ने डूबा दिया।।

ख्वाब देखे थे जो हमने,तारे तोड़ लाने के,

टूटकर आसमाँ से ओझल,तेरे इश्क़ ने करा दिया।।


ख्वाहिशें अब भी है बाक़ी, गौरव इश्क़ करने की,

यूँ ना था ज़िद्दी कभी मैं, तेरे इश्क़ ने बना दिया।।


🙏🙏🙏✍️गौरव

05.08.2020

भोपाल मध्यप्रदेश

बुधवार, 16 जुलाई 2025

सज़ा ए इश्क़

                                   सज़ा-ए-इश्क़ 

मुजरिम हूं तेरे इश्क का, सख्ती से पेश आइए,

जमानत-ए-रिहाई सिर्फ तू हो, ऐसी सजा सुनाइए।।


उम्र कैद दीजिए या फिर सूली चढ़ाइए 

बांधने मुझे अपनी बांहों की जंजीर बनाइए।।


मेरा हाकिम तू, वकील तू, गवाह तू ही है,

अब और बहस की तकलीफ मत उठाइए।।


मेरे इश्क की तफ़्तीश में,तेरी उम्र गुजर गई,

अब तो एक फैसला मेरे हक में सुनाइए।।


मेरे इश्क के हर गुनाह में शामिल तो तू भी है,

तो फिर जो भी हो सजा मुझे, मेरा साथ निभाइए।। 

✍️गौरव

16.07.2025

सोमवार, 7 जुलाई 2025

कलम गौरव की....

कलम गौरव की...


कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,
सभी ने छोड़ दिया तुमको,
मुझे भी छोड़ दो अब तुम"

बहुत कुछ लिख लिया तुमने, 
उनकी यादों के साये में
वो अब भी लौट आयेगें,
भरम ये तोड़ दो अब तुम
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,"

लिखे जो लफ्ज़ तुमने थे 
उसी के नाम से हर रोज़,
लिखी जो नज़्म भावों से
बनी दिल पर है अब बोझ
उन्हीं नज़्मों को कर के राख
हवाओं में उड़ा दो तुम।
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,"

ये काग़ज़ अब नहीं सहते 
तेरे ग़म की स्याही को,
दर्द में डूबे गीतों को
अश्क में भीगे शब्दों को
बनाकर नाव कागज़ की
दरिया में बहा दो तुम।
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,

ना उम्मीद है कोई
ना शिकवा कोई बाकी है,
तुझे तन्हा ही है जीना,
ना कोई साथ बाकी है
अगर लिखना है आगे भी,
तो पिछला सब मिटा दो तुम।
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,

नही तन्हा तुम कोई,
तुम्हारी सच्ची साथी हूँ
चले गए सब, ये सच है,
मगर तुम अब भी बाकी हो।
नई पुस्तक के पन्नो पर
बस तेरी कहानी हो।
उठा लो फिर से मुझको और,
अब खुदको ही लिखना तुम
 कलम ये कह रही मुझसे,
कि "लिखना छोड़ना मत तुम,
सभी ने छोड़ दिया तुमको,
मुझे मत छोड़ना बस तुम"
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ना मत तुम,"
✍️गौरव
08.07.2025

शनिवार, 5 जुलाई 2025

मुलाकात

 

वो जो कहती थी, मैं भूल जाया करती हूँ

आज मिली तो, सालों पुरानी बातें कर रही थी,

बहुत दिलचस्प हो गया हूँ अब मैं उसके लिए,

मुझसे मिलके मेरी ही बातें याद कर रही थी....


उसकी आँखों में थी एक नई सी चमक,

जैसे बरसों बाद मिला हो कोई खोया हुआ शख्स,

दिल की गहराइयों में मेरी बातें टटोल रही थी,

मेरे लफ्ज़ों को वो आज भी संभाल रही थी....


उसकी हर बात में थी एक अनकही सी बात,

जैसे अधूरी रह गई हो कोई पुरानी मुलाकात,

उसके लहजे में थी सादगी, था एक ठहराव,

जैसे वक्त ने बाँध लिया हो उसका हर एक भाव...

मेरी हर याद को वो दिल से लगा रही थी,

मुझमें खोकर जैसे खुद को ही पा रही थी...

मुझमें खोकर जैसे खुद को ही पा रही थी...✍️गौरव

05.07.2025

गुरुवार, 3 जुलाई 2025

एक बार फिर वैसे मिलें

 

फिर एक बार वैसे मिलें

✍️ — गौरव

चलो एक बार फिर वैसे मिलें

जैसे मिले थे पहली दफा,

ना हो कोई पर्दा बातों में,

ना हो दरमियाँ कोई फासला

चलो एक बार फिर वैसे मिलें

जैसे मिले थे पहली दफा,


तुम मुस्कुराओ वैसे ही,

मुझे देख शरमाओ वैसे ही,

परत दर परत खुलो मुझसे,

मुझ पर हक जताओ वैसे ही


वो चुप्पियाँ फिर से बोले ज़रा,

सांसों का शोर हो हर जगह,

नज़रों की जुबां फिर समझने लगें

इशारों में हाले-दिल कर दें बयां

चलो एक बार फिर वैसे मिलें

जैसे मिले थे पहली दफा,


भूलकर आज और आने वाला कल,

चलो फिर से जी लें बीता हुआ कल,

ना कोई शिकवा, ना कोई सवाल,

बस याद करें वही प्यार भरे पल।


दोनों को मिलें प्यार के 

फिर वही निशां,

जैसे मिले थे 

पहली दफा,

चलो एक बार फिर वैसे मिलें

जैसे मिले थे पहली दफा,

✍️गौरव

04.07.2025

शनिवार, 24 मई 2025

इश्क़❤️


करना नहीं था जो हमें, हम वो भी कर गए 

रहना था दूर इश्क से, पर तुमपे मर गए 

डूबे थे इस कदर कि, हमें होश ना रहा 

दरिया की गहराई में, जाने कब उतर गए 

करना नहीं था जो हमें, हम वो भी कर गए 

रहना था दूर इश्क से, पर तुमपे मर गए 


दिल ने सुनी थी जब कभी, तुम्हारी इक सदा 

ख्वाबों को सजाने से खुद को, रोक ना सके 

इक वार नजर का रहा, काफी जंग में 

हम खो गए थे ऐसे, खुद को खोज ना सके 

करना नहीं था जो हमें, हम वो भी कर गए 

रहना था दूर इश्क से, पर तुमपे मर गए 


तेरे बिना ये साँसे, अधूरी सी हैं लगें 

इन धड़कनो में अब तो, तेरा नाम ही चले 

बेताबियों की आग में है, जिस्म तपा के 

इस रूह को काबिल है, बनाया तेरे लिए 

करना नहीं था जो हमें, हम वो भी कर गए 

रहना था दूर इश्क से, पर तुमपे मर गए 


अब ये भी जरूरी नहीं, चाहो तुम हमें 

ये इश्क की रस्में नहीं, बदले में कुछ मिले

अब क्या करें परवाह, जब खुदको मिटा चुके 

सब है कुबूल इश्क़ में, अब हमको जो मिले 

सब है कबूल इश्क़ में, अब हमको जो मिले 

सब है कुबूल इश्क़ में, अब हमको जो मिले....✍️गौरव

24.05.2025