रविवार, 4 अक्टूबर 2026

सेवा निवृत्ति काव्य


​सेवा में रहा समर्पण और त्याग आपका,

कृतज्ञ रहेगा सदा विभाग आपका।

हम अनुचर हैं आपके, पदचिन्ह चलेंगे,

विश्वास है मिलता रहेगा साथ आपका।।


​अनमोल है खज़ाना अनुभव का आपका,

साझा किया ये ज्ञान, है उपकार आपका।

हो आम या हो ख़ास सबसे मर्यादित रहे,

है अनुसरण योग्य ये व्यवहार आपका।।


​शुभकामनाएं और धन्यवाद आपका,

अब स्वस्थ रहें, मस्त रहे संसार आपका।

विदाई की इस बेला में मन हो रहा उदास,

हृदय में रहेगा सदा निवास आपका...।। ✍️गौरव

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