सोमवार, 30 मार्च 2026

लड़को वाली बात

 

लड़को वाली बात


अब वो आशिक़ी नहीं रही,

अब वो आवारगी नहीं रही,

तुझे देखने की हसरत में

फिरते थे मारे-मारे,

अब वो पागलपन,

वो दीवानगी नहीं रही।


तज़ुर्बा हो गया है अब,

दूर रहकर भी रिश्ते

निभा लेता हूँ मैं।

हंसता भी हूँ, हंसाता भी हूँ,

टूटे दिल के साथ भी

खुद को संभाल लेता हूँ मैं।


अब वो खाम-ख्याली नहीं रही,

तसव्वुर में भी हकीकत यही रही,

फ़र्ज़ों ने गढ़ दिया

एक नया शख्स मुझमें,

अब मुझमें वो

लड़कों वाली बात नहीं रही। ✍️गौरव

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शनिवार, 7 मार्च 2026

मुसाफ़िर की तलाश

                                 मुसाफ़िर की तलाश

मुखड़ा (Hook)

कहीं मिले खुशियाँ तो लेते आना,

कहीं मिले सुकून तो लेते आना।

थक गया हूँ ज़िंदगी के मसलों से,

कहीं मिले नींद… तो लेते आना।।

Verse 1

अब इस सफ़र का कोई ठौर नहीं दिखता,

मेरी उलझनों का कोई छोर नहीं दिखता।

जाने कहाँ से रोज़ सवाल चले आते हैं,

जवाबों के सिवा कुछ और नहीं दिखता।।

कभी करो सफ़र तो इधर से गुज़रना,

कभी मिले वक़्त तो दो पल ठहरना।

राह-ए-तन्हाई के इस अँधेरे मोड़ पर,

कहीं मिले भोर… तो लेते आना।।

Verse 2

करता हूँ तलाश… फिर भी कोई नहीं मिलता,

दे ज़िंदगी में साथ… ऐसा कोई नहीं मिलता।

मिलते तो बहुत हैं ग़म बाँटने मुझसे,

पर मेरा ग़म बाँट ले… ऐसा कोई नहीं मिलता।।

कभी मिले फुर्सत… तो ग़म बाँटते जाना,

मेरे चेहरे की हर शिकन मिटाते जाना।

फिर चल पड़ूँ मैं बनकर कारवाँ ज़माने में,

बस इतनी सी उम्मीद… मुझे दिलाते जाना।।

Bridge

बहुत शोर है दुनिया की राहों में,

कहीं मिले ख़ामोशी… तो लेते आना।

खो गया हूँ भीड़ में खुद को खोजते खोजते,

कहीं मिल जाए तुम्हें गौरव… तो लेते आना।।

Final Hook

कहीं मिले खुशियाँ तो लेते आना,

कहीं मिले सुकून तो लेते आना।

थक गया हूँ ज़िंदगी के मसलों से,

कहीं मिले नींद… तो लेते आना।।✍️गौरव

07.3.26

10.50 PM 

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