रविवार, 29 जनवरी 2012

10 janpath.


भ्रष्ट हों,भले खड़े,लुटेरे हों,बड़े बड़े,
किसी की शुद्धत्ता कभी,
जांच मत,जांच मत,
१० जनपथ ,१० जनपथ, १० जनपथ !!

तू ना देखेगा कभी,
तू ना कहेगा कभी,
तू न सुनेगा कभी,
कर शपथ,कर शपथ,कर शपथ,
१० जनपथ ,१० जनपथ, १० जनपथ !!

इस महान देश को,
लूट रहा विदेश है,
ज़र,ज़मीन,जेब से,
सोच मत,सोच मत,सोच मत,
१० जनपथ ,१० जनपथ, १० जनपथ !!

बुधवार, 25 जनवरी 2012

गणतंत्र दिवस


ना मनाऊंगा गणतंत्र दिवस,
ये देश नहीं आज़ाद हुआ
चंद गद्दारों के चंगुल में फंस,
संविधान का विनाश हुआ

हुई लोकतंत्र की हत्या,
कई बार ये कत्ले आम हुआ
जाति धर्म में बांटा हमको,
कहाँ का ये संविधान हुआ

भूखी रोती जनता को ना,
रोटी तक का सहारा है
जंजीरों में जकड़ा सा
ये भारत हमारा है

सत्ता लोलुप,चाटुकारों,
मनाओ ये गणतंत्र तुम्हारा है,
ये गणतंत्र तुम्हारा है,
ये गणतंत्र तुम्हारा है!!!

शनिवार, 7 जनवरी 2012

गुमनाम सा हो गया है!!!


कुछ दूर से ही सही,एक बार देख लो उस घर कि तरफ,

जो तेरे जाने के बाद, वीरान सा हो गया है,

एक झलक ही काफी है, उस शख्स के लिए तेरी,

जो तेरे जाने के बाद, गुमनाम सा हो गया है!!


क्या कभी याद नहीं आते तुम्हे वो दिन,

मेरी आगोश में गुजरे वो पलछिन,

वो दिवाली के जश्न ,वो होली के रंग,

इस घर की दीवारों पे जो बिखेरे संग संग,

वो हाथों की मेहँदी,वो सजना संवरना तेरा,

वो हाथों में हाथ लेकर,उन्हें चूमना मेरा, 

कैसे भुला पाओगे मेरे स्पर्श के अहसास को,

या किसी और के स्पर्श का अहसास हो गया है,

एक झलक ही काफी उस शख्स के लिए तेरी,

जो तेरे जाने के बाद,गुमनाम सा हो गया है!!


अब तेरी यादों के सिवा कुछ याद नहीं,

मौत का भी मुझे इंतज़ार नहीं,

अकेला तन्हा भटकता हूँ,इस घर में,

अब तो दीवारें भी बात करने को तैयार नहीं,

इस उम्मीद में जी रहा हूँ कि तुम आओगे,

जब भी आओगे,दरवाज़ा खुला पाओगे..

जब भी आओगे,दरवाज़ा खुला पाओगे...

...................गौरव.......................

कुछ रिश्ते.....


कुछ रिश्ते अजीब होते है,

दुनिया के बंधनों से अनजान

उम्र के तकाजों से दूर

बस दिल के करीब होते है,

कुछ रिश्ते अजीब होते है!

जाति-धर्म के भेद से परे,

रीति रिवाजों की दहलीज के पार,

चेहरे का रंग जिनमे दिखाई नहीं देता,

बस दिल से दिल जुड़े होते है,

कुछ रिश्ते अजीब होते है!

बहुत सोचा कि क्या नाम दूँ इन्हें,

दोस्ती कहूँ,प्यार कहूँ,या कुछ और,

पर कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं होते,

बस दिल से दिल जुड़े होते है,

कुछ रिश्ते अजीब होते है!!!!

..........गौरव..................

बड़ा अच्छा लगता है!


यूँ तुम्हारी गोद में सर रखकर सोना बड़ा अच्छा लगता है,

मेरी आँखों में तैरता हसीं ख्वाब अब सच्चा लगता है!

यूँ तेरा मेरे बालों में अपनी उंगलियों को फिराना,

जन्नत का अहसास देता है तेरा मुस्कुराना,

और कुछ नहीं चाहिए अब जिंदगी से सिवा इसके,

ये वक्त थम जाये यही,ये शाम कभी ना बीते,

तुम मुझे देखती रहो,मैं तुम्हे देखता रहूँ,

पल भर के लिए ही सही ज़माने को भुला दूँ,

तुम्हारी आँखों में अपना चेहरा देखना अच्छा लगता है,

तुम्हारी गोद में सर रखकर सोना अच्छा लगता है!

और करीब आओ कि मेरी प्यास बाद रही है,

लबो को छूने की तलाश बढ़ रही है,

हसीं मौसम में हसीं गुश्ताखियाँ होने दो,

जिस्म की नहीं रूह की तसल्ली होने दो,

मेरा तुझमे,तुम्हारा मुझमें,खोना अच्छा लगता है,

कुछ और नहीं बस,यूँही रहना अच्छा लगता है,

तुम्हारी गोद में सर रखकर सोना अच्छा लगता है !!!!!!


.............गौरव...............

उलझन


उलझ सी गयी है जिंदगी,

कुछ अनसुलझे से रिश्तों में,

अपने जैसे परायों में,

परायों जैसे अपनों में ,


आवारा भटकता मचलता बादल,

जब सिसक सिसक कर रोता है,

तपती धरती खुश होती है,

उसके आंसू की बरसातों में,


जो कहते थे अक्सर हमको,

तुम क्या याद करोगे हमें,

वही भुलाये बैठे है,

हम खोएं उनकी यादों में,


एक लफ्ज़ बना है आयत मेरी,

हर वक्त मैं सजदा करता हूँ,

तेरा नाम हमेशा गूँजता रहता,

मेरे मन के सारे ख्यालों में,


उलझ सी गयी है जिंदगी,

कुछ अनसुलझे से रिश्तों में,

अपने जैसे परायों में,

परायों जैसे अपनों में...

TIHAD-WARD


scene-1 राजा-कन्नी अकेले में...

कन्नी (डरते हुए):- राजा कन्नी, कन्नी राजा की,जेल कहानी है मुश्किल 
अनर सिंह ये CD, बना के ना ले जाये,
एक नेता और एक नेती की, ये कहानी है नई
अनर सिंह ये CD, बना के ना ले जाये :(

राजा (daring se):-राजा कन्नी, कन्नी राजा की, जेल कहानी है मुश्किल 
अनर सिंह ये CD, बना भी ना पाये,
एक नेता और एक नेती की ये कहानी है नई
अनर सिंह ये CD, बना भी ना पाये 

कन्नी :-एक दूजे से जुदा रहे,अब एक दूजे से है मिले 
राजा कन्नी, कन्नी राजा की जेल कहानी है मुश्किल 
अनर सिंह ये CD बना भी ना पाये 
एक नेता और एक नेती की ये कहानी है नई
अनर सिंह ये CD बना भी ना पाये :)
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scene-2
कालामणि:-जब तिहाड़ में आया,तो समझ में आया 
सारा घोटाला तो,शूनिया ने कराया 
क्यों खुदा तू बता दे, जो घोटाला कराये, उसे भी तो तिहाड़ भेजना था.
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Back to scene-1
कन्नी:-एक दूजे से जुदा रहे,अब एक दूजे से है मिले 
राजा:-राजा कन्नी की बातों का,हर लम्हा PM ने जाना 
दो लफ्जों में ये बयां ना हो पाये
हर घोटाले की शूनिया मालिक, मेरा तो बस था मेहनताना 
दो लफ्जों में ये बयां ना हो पाये 
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अनर सिंह:-कैसे बाहर मैं जाऊँ,काश BAIL हो जाये
कालामणि:-कैसे PM को पकडूँ,कैसे शून्या पकड़ाये,
राजा:-ये तड़प कह रही है टूट जाये ये दीवारे,भाग जाये हम यहाँ से, दो बेचारे 
कन्नी:-एक दूजे से जुदा रहे,अब एक दूजे से है मिले 
राजा:-लाख छियत्तर हज़ार करोड़ को, कैसे कैसे बंटवाना 
दो लफ्जों में ये बयां ना हो पाये 
हर घोटाले की शूनिया मालिक, मेरा तो बस था मेहनताना 
दो लफ्जों में ये बयां ना हो पाये 
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सभी भ्रष्टाचारी नेतागण (कोरस में) 
हर घोटाले की शूनिया मालिक अपना तो बस था मेहनताना 
दो लफ्जों में ये बयां ना हो पाये 
दो लफ्जों में ये बयां ना हो पाये........सभी अपने अपने बैरक में जाते हुए!!!
!!!!!!समाप्त!!!!