शनिवार, 23 मई 2020

बना ले वक़्त अपना

INTRO [INSTRUMENTAL]
बना ले मुझे चूड़ी,
तेरी कलाई में, 
खनका करूँ मैं,
बना ले मुझे पायल,
तेरे पैरों में, 
छनका करूँ मैं,

VERSE 
बना ले मुझे चूड़ी,
तेरी कलाई में, 
खनका करूँ मैं,
बना ले मुझे पायल,
तेरे पैरों में, 
छनका करूँ मैं,
बना के मुझे बिंदी ,
अपने माथे पे, 
रोशन कर,
या बना ले मुझे झुमका,
तेरे कानो में, 
लटका करूँ मैं,
ख्वाहिशें ज्यादा नही,
बस इतनी सी, तमन्ना है,
बना ले मुझे वक्त अपना,
तेरे साथ ही गुजरा करूँ मैं,

बना ले मुझे वक्त अपना,
तेरे साथ ही गुजरा करूँ मैं,

बना ले मुझे वक्त अपना,
तेरे साथ ही गुजरा करूँ मैं,

INSTRUMENTAL BREAK 

VERSE 1
बसर कर मेरी सोच में,
तेरे लिए लिखता रहूँ, मैं,
असर कर मेरी सांसो में,
तुझे दिखता रहूँ, मैं
संवर कर चल मेरे साथ,
मंजिलों की तलाश में,
ठहर कर रास्तों में,
कुछ पल तुझे तकता रहूँ मैं,

बना ले मुझे वक्त अपना,
तेरे साथ ही, गुजरा करूँ मैं,
बना ले मुझे वक्त अपना,
तेरे साथ ही, गुजरा करूँ मैं,
INSTRUMENTAL BREAK 

OUTRO
ना दूर कर मुझे,
टूटे शीशे की तरह,
लेके तेरा नाम,
दर बदर भटका करूँ मैं,
बांध लें अपने गले में,
काले धागे की तरह,
बना ले मुझे वक्त अपना,
तेरे साथ ही गुज़रा करूँ मैं
बना ले मुझे वक्त अपना,
तेरे साथ ही, गुजरा करूँ मैं,

बना ले मुझे वक्त अपना,
तेरे साथ ही, गुजरा करूँ मैं,

तेरे साथ ही, गुजरा करूँ मैं,
[Fade out]
✍️©️गौरव


शुक्रवार, 22 मई 2020

तुम ज़िन्दगी

तुम रोशनी 
तुम चांदनी
तुम जीवन 
ताल की रागिनी
तुम सादगी 
तुम ताज़गी
तुम आशिको 
की आशिक़ी
तुम रोशनी 
तुम चांदनी
तुम जीवन 
ताल की रागिनी
तुम सादगी 
तुम ताज़गी
तुम आशिको 
की आशिक़ी
{Instrumental break}

तुम प्रीत हो 
मनमीत हो
तुम नगमा हो 
तुम गीत हो
तुम मेरे दिल 
की तान का
सबसे मधुर 
संगीत हो
तुम शायरों 
की शायरी
मुशायरो 
की मौशिकी
तुम बानगी 
दीवानगी
तुम सांसो की
रवानगी
{Instrumental break}

सुनो ऐ हसीं 
तुम हो खुशी
तुम खुदा की 
जैसे बंदगी
तुम्हे और क्या 
मैं नाम दूँ
तुम ज़िन्दगी 
तुम ज़िन्दगी
तुम ज़िन्दगी 
तुम ज़िन्दगी

A SONG BY GAURAV SHAKYA

शनिवार, 16 मई 2020

मेरी व्यथा...

बहुत पढ़े होंगें आपने,
प्रेम कथाओं के वर्णन
जीवन चरित्रों के चित्रण,
विरह वेदना के मंथन
अब मेरी, व्यथा भी समझिये
कीजिये कुछ, इस पर  चिंतन....
हूँ, शासकीय सेवा में
चिकित्सक धर्म निभाता हूँ,
कोरोना संदिग्धों की जांच मै करता
घर घर दवा बंटवाता हूँ
45 दिन बीत गए,
ना देखा अपनी गुड़िया को,
मेरा नन्हा मुन्ना राजा
है 10 महीने का होने को...
घर से मेरी बूढ़ी अम्मा
करके फोन बुलाती है,
विरह वेदना से पीड़ित
मेरी पत्नी मुझे रुलाती है...
पापा तुम कब आओगे
बिटिया, पूछती बातों बातों में
कैसे बता दूँ तुमको बेटा
ये नही है मेरे हाथों मे,
बिस्किट, चॉकलेट ,आइसक्रीम सब
लेकर इक दिन आता हूँ
झूठी मूठी बातों से,
उसको विश्वास दिलाता हूँ...
पर अब मै, ये जान गया
सरकारो ने भी माना है
खत्म ना होगा कोरोना ये
इसके साथ ही जीते जाना है...
तो खत्म करो, ये तालाबंदी
उठाओ, हम पर से पाबंदी
अवकाशों की स्वीकृति देकर
घर जाने की दो रज़ामंदी...
तन मन से हूँ थका हुआ
अब नही बची, सहने की शक्ति
अब नही बची, सहने की शक्ति...©️✍️गौरव

गुरुवार, 14 मई 2020

मज़दूर

ना होता मैं जो, शहरों में
कैसे, पहचान बनाते तुम ?
कैसे, कारोबार तुम करते ?
कैसे घर मकान बनाते तुम ?
ना होता जो मैं, खेतो में
कैसे, धान लगाते तुम ?
ना होता जो मैं,बागों में
फल फूल कहाँ से लाते तुम ?
अब मैं हूँ, उन सड़को पे
मैंने ही बनाया, है जिनको
नाप नाप के बनी थी जो
मैं, पैदल नाप रहा उनको
नही सहारा मिला मुझें
उन सारे ठेकेदारों से
ना कर दी व्यवस्था मेरे लिए
मेरी ही सरकारो ने
विकास धरा का, करने वाला
विकास धारा से, दूर हूँ मैं
अपने पांव में छाले लिए
पैदल चलता, मज़दूर हूँ मैं
अपने पांव में छाले लिए
पैदल चलता, मज़दूर हूँ मैं...✍️©️गौरव

रविवार, 10 मई 2020

बेमौसम बारिश

मई के इस महीने की
बेमौसम सी बारिश में
मन करता है निकल जाऊ
तुम्हे लेके साथ मे
किसी पर्वत की वादियों की
ठंडी ठंडी हवाओं में
कलकल बहती किसी नदी की
लकड़ी वाली नाव में
बर्फ के चादरों से ढंकी
कोई झील हो अपनी राह में
तन मन हो जाये शीतल मेरा
तुम्हारी जुल्फों की छांव में
बारिश से पहले मौसम की
सुहानी सी शाम में
पैदल पैदल दोनो चले
हाथो में हाथ थाम लें
मन करता है निकल जाऊ
तुम्हे लेके साथ मे...✍️गौरव




शनिवार, 9 मई 2020

माँ...

सागर भी ना गहरा उतना
ना नभ का विस्तार है,
अपने बच्चों के लिए जितना
माँ के मन मे प्यार है।
भूख लगी तो मम्मी मम्मी
चोट लगी तो उइ माँ उई माँ
दुख की हर घड़ी में बस
माँ ही तारणहार है।
भगवान भी जिसकी पूजा करते
जब जब आते संसार में,
उस माता को नमन करे हम
वो ईश्वर का अवतार है...✍️©️गौरव
🌺HAPPY MOTHER'S DAY🌺
♥️LOVE YOU MUMMY ♥️

बुधवार, 6 मई 2020

ऐसे मन बहलाता हूँ..


सोचता हूँ बैठ अकेले
तेरे संग जो सुख दुख झेले
तेरे साथ है प्यार के मेले
मैं उन मेलों में
अक्सर गुम हो जाता हूँ
ऐसे मन बहलाता हुँ
मैं ऐसे मन बहलाता हुँ।

प्रतीक्षा की घडियों में
कल्पना की कड़ियों में
तेरे बालों की लड़ियों में
शब्दो के मोती पिरोकर
मैं गीत नया बन जाता हूँ
ऐसे मन बहलाता हुँ
मैं ऐसे मन बहलाता हुँ।

सिलसिला मुलाकातों का
हर समय तेरी बातों का
समंदर है तेरी यादों का
में डूबकर इसमे
फिर ना उतराता हुँ
ऐसे मन बहलाता हुँ।
मैं ऐसे मन बहलाता हुँ...✍️©️गौरव