बुधवार, 16 जुलाई 2025

सज़ा ए इश्क़

                                   सज़ा-ए-इश्क़ 

मुजरिम हूं तेरे इश्क का, सख्ती से पेश आइए,

जमानत-ए-रिहाई सिर्फ तू हो, ऐसी सजा सुनाइए।।


उम्र कैद दीजिए या फिर सूली चढ़ाइए 

बांधने मुझे अपनी बांहों की जंजीर बनाइए।।


मेरा हाकिम तू, वकील तू, गवाह तू ही है,

अब और बहस की तकलीफ मत उठाइए।।


मेरे इश्क की तफ़्तीश में,तेरी उम्र गुजर गई,

अब तो एक फैसला मेरे हक में सुनाइए।।


मेरे इश्क के हर गुनाह में शामिल तो तू भी है,

तो फिर जो भी हो सजा मुझे, मेरा साथ निभाइए।। 

✍️गौरव

16.07.2025

सोमवार, 7 जुलाई 2025

कलम गौरव की....

कलम गौरव की...


कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,
सभी ने छोड़ दिया तुमको,
मुझे भी छोड़ दो अब तुम"

बहुत कुछ लिख लिया तुमने, 
उनकी यादों के साये में
वो अब भी लौट आयेगें,
भरम ये तोड़ दो अब तुम
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,"

लिखे जो लफ्ज़ तुमने थे 
उसी के नाम से हर रोज़,
लिखी जो नज़्म भावों से
बनी दिल पर है अब बोझ
उन्हीं नज़्मों को कर के राख
हवाओं में उड़ा दो तुम।
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,"

ये काग़ज़ अब नहीं सहते 
तेरे ग़म की स्याही को,
दर्द में डूबे गीतों को
अश्क में भीगे शब्दों को
बनाकर नाव कागज़ की
दरिया में बहा दो तुम।
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,

ना उम्मीद है कोई
ना शिकवा कोई बाकी है,
तुझे तन्हा ही है जीना,
ना कोई साथ बाकी है
अगर लिखना है आगे भी,
तो पिछला सब मिटा दो तुम।
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ दो अब तुम,

नही तन्हा तुम कोई,
तुम्हारी सच्ची साथी हूँ
चले गए सब, ये सच है,
मगर तुम अब भी बाकी हो।
नई पुस्तक के पन्नो पर
बस तेरी कहानी हो।
उठा लो फिर से मुझको और,
अब खुदको ही लिखना तुम
 कलम ये कह रही मुझसे,
कि "लिखना छोड़ना मत तुम,
सभी ने छोड़ दिया तुमको,
मुझे मत छोड़ना बस तुम"
कलम ये कह रही मुझसे, 
कि "लिखना छोड़ना मत तुम,"
✍️गौरव
08.07.2025

शनिवार, 5 जुलाई 2025

मुलाकात

 

वो जो कहती थी, मैं भूल जाया करती हूँ

आज मिली तो, सालों पुरानी बातें कर रही थी,

बहुत दिलचस्प हो गया हूँ अब मैं उसके लिए,

मुझसे मिलके मेरी ही बातें याद कर रही थी....


उसकी आँखों में थी एक नई सी चमक,

जैसे बरसों बाद मिला हो कोई खोया हुआ शख्स,

दिल की गहराइयों में मेरी बातें टटोल रही थी,

मेरे लफ्ज़ों को वो आज भी संभाल रही थी....


उसकी हर बात में थी एक अनकही सी बात,

जैसे अधूरी रह गई हो कोई पुरानी मुलाकात,

उसके लहजे में थी सादगी, था एक ठहराव,

जैसे वक्त ने बाँध लिया हो उसका हर एक भाव...

मेरी हर याद को वो दिल से लगा रही थी,

मुझमें खोकर जैसे खुद को ही पा रही थी...

मुझमें खोकर जैसे खुद को ही पा रही थी...✍️गौरव

05.07.2025

गुरुवार, 3 जुलाई 2025

एक बार फिर वैसे मिलें

 

फिर एक बार वैसे मिलें

✍️ — गौरव

चलो एक बार फिर वैसे मिलें

जैसे मिले थे पहली दफा,

ना हो कोई पर्दा बातों में,

ना हो दरमियाँ कोई फासला

चलो एक बार फिर वैसे मिलें

जैसे मिले थे पहली दफा,


तुम मुस्कुराओ वैसे ही,

मुझे देख शरमाओ वैसे ही,

परत दर परत खुलो मुझसे,

मुझ पर हक जताओ वैसे ही


वो चुप्पियाँ फिर से बोले ज़रा,

सांसों का शोर हो हर जगह,

नज़रों की जुबां फिर समझने लगें

इशारों में हाले-दिल कर दें बयां

चलो एक बार फिर वैसे मिलें

जैसे मिले थे पहली दफा,


भूलकर आज और आने वाला कल,

चलो फिर से जी लें बीता हुआ कल,

ना कोई शिकवा, ना कोई सवाल,

बस याद करें वही प्यार भरे पल।


दोनों को मिलें प्यार के 

फिर वही निशां,

जैसे मिले थे 

पहली दफा,

चलो एक बार फिर वैसे मिलें

जैसे मिले थे पहली दफा,

✍️गौरव

04.07.2025

शनिवार, 24 मई 2025

इश्क़❤️


करना नहीं था जो हमें, हम वो भी कर गए 

रहना था दूर इश्क से, पर तुमपे मर गए 

डूबे थे इस कदर कि, हमें होश ना रहा 

दरिया की गहराई में, जाने कब उतर गए 

करना नहीं था जो हमें, हम वो भी कर गए 

रहना था दूर इश्क से, पर तुमपे मर गए 


दिल ने सुनी थी जब कभी, तुम्हारी इक सदा 

ख्वाबों को सजाने से खुद को, रोक ना सके 

इक वार नजर का रहा, काफी जंग में 

हम खो गए थे ऐसे, खुद को खोज ना सके 

करना नहीं था जो हमें, हम वो भी कर गए 

रहना था दूर इश्क से, पर तुमपे मर गए 


तेरे बिना ये साँसे, अधूरी सी हैं लगें 

इन धड़कनो में अब तो, तेरा नाम ही चले 

बेताबियों की आग में है, जिस्म तपा के 

इस रूह को काबिल है, बनाया तेरे लिए 

करना नहीं था जो हमें, हम वो भी कर गए 

रहना था दूर इश्क से, पर तुमपे मर गए 


अब ये भी जरूरी नहीं, चाहो तुम हमें 

ये इश्क की रस्में नहीं, बदले में कुछ मिले

अब क्या करें परवाह, जब खुदको मिटा चुके 

सब है कुबूल इश्क़ में, अब हमको जो मिले 

सब है कबूल इश्क़ में, अब हमको जो मिले 

सब है कुबूल इश्क़ में, अब हमको जो मिले....✍️गौरव

24.05.2025

बुधवार, 21 मई 2025

चाय पर तुम

सुबह की धूप हो

या शाम का मौसम 

बन जाता है हर पल 

खुशनुमा आलम 

देता सुकून मुझको 

जब होती हो मेरे साथ 

चाय पर तुम 


चाय पर तुम 

चाय पर तुम 


उबलती चाय के 

जैसी तुम्हारी हँसी

अदरक सी तीखी 

मीठी इलायची 

दोनों के जादू से 

मैं बंधा रहूँ हरदम 

जब होती हो मेरे साथ 

चाय पर तुम 


चाय पर तुम 

चाय पर तुम 


चाय की भाप सी 

गर्म तुम्हारी साँसे 

हर चुस्की में बसी 

मीठी तुम्हारी बातें 

हर घूंट में उमड़ता

प्यार का नया रंग

जब होती हो मेरे साथ 

चाय पर तुम 


चाय पर तुम 

चाय पर तुम 


चाय पर चर्चा से 

चलती है गाड़ी 

दोनों मिलके गढ़ते हैं 

ज़िन्दगी हमारी 

तुम्हारी चाय के स्वाद सा 

बना लेंगे ये जीवन 

सदा रहना मेरे साथ 

चाय पर तुम 


चाय पर तुम 

चाय पर तुम....✍️गौरव

22.05.25

सोमवार, 19 मई 2025

पैरोडी हिंदुस्तानी

 सुनो पाक के चपडगंजूओं

तुम बस अपनी कौम बचा लो


सुनो पाक के चपडगंजूओं

तुम बस अपनी कौम बचा लो

कितने भी तुम ड्रोन उड़ा लो

सबको फोड़ेंगे हम हिंदुस्तानी


सुनो पाक के चपडगंजूओं

तुम बस अपनी कौम बचा लो

कितने भी तुम ड्रोन उड़ा लो

सबको फोड़ेंगे हम हिंदुस्तानी


हिंदुस्तानी


पहले पेला था, फिर से पेला

हमने पेला था, लो फिर से पेला



सुनो पाक के चपडगंजूओं

तुम बस अपनी कौम बचा लो

कितने भी तुम ड्रोन उड़ा लो

सबको फोड़ेंगे हम हिंदुस्तानी


हिंदुस्तानी

व्हो हो हो हो हो हो हिंदुस्तानी

व्हो हो हो हो हो हो हो हो

व्हो हो हो हो हो हो हिंदुस्तानी

व्हो हो हो हो हो हो हिंदुस्तानी


भूखे भिखारी हो टुच्चे कबाड़ी हो

फिर भी तुम रुकते नही

आतंकी यारों का साथ निभाने से

तुम पीछे हटते नही


हिन्द का ये दौर है

जोश भी पुरजोर है

घर मे घुसके मारता

पापियों के ठौर है


हिन्द का ये दौर है

जोश भी पुरजोर है

घर मे घुसके मारता

पापियों के ठौर है


पहले पेला था, फिर से पेला

हमने पेला था, लो फिर से पेला


सुनो पाक के चपडगंजूओं

तुम बस अपनी कौम बचा लो

कितने भी तुम ड्रोन उड़ा लो

सबको फोड़ेंगे हम हिंदुस्तानी


हिंदुस्तानी

व्हो हो हो हो हो हो हिंदुस्तानी

व्हो हो हो हो हो हो हो हो

व्हो हो हो हो हो हो हिंदुस्तानी

व्हो हो हो हो हो हो हिंदुस्तानी


चड्डी पहनाएंगे आटा दिलाएंगे

नंगों को मारते नहीं

गंदी जो हरकत की

कोई भी जुर्रत की

फिर बेटा छोड़ते नही


चड्डी पहनाएंगे आटा दिलाएंगे

नंगों को मारते नहीं

गंदी जो हरकत की

कोई भी जुर्रत की

फिर बेटा छोड़ते नही


आर्मी के पास है

सुदर्शन झक्कास है

 राफेल आकाश है

ब्रह्मोस तो खास है


आर्मी के पास है

सुदर्शन झक्कास है

 राफेल आकाश है

ब्रह्मोस तो खास है


पहले पेला था, फिर से पेला

हमने पेला था, लो फिर से पेला


सुनो पाक के चपडगंजूओं

तुम बस अपनी कौम बचा लो

कितने भी तुम ड्रोन उड़ा लो

सबको फोड़ेंगे हम हिंदुस्तानी


हिंदुस्तानी

व्हो हो हो हो हो हो हिंदुस्तानी

व्हो हो हो हो हो हो हो हो

व्हो हो हो हो हो हो हिंदुस्तानी

व्हो हो हो हो हो हो हिंदुस्तानी




✍️गौरव 20.05.2025

12.17 pm